शरपसनद गोमांस का मुद्दा उठा कर अलीग़ढ विश्वविद्यालय को बदनाम करने के फ़िराक में

By raising the issue of beef Srpasnd Firak to discredit the university in Aligarh
By raising the issue of beef Srpasnd Firak to discredit the university in Aligarh

अलीघढ़ : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अब गोमांस का विवाद खड़ा करके बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। एक उर्दू न्यूज़ पोर्टल के अनुसार सोशल मीडिया पर कल एक मामला उठा। वहाटस एप्लिकेशन के एक पोस्ट में आरोप लगाया गया कि एएमयू मेडिकल कॉलेज की कैंटीन में ‘गोमांस बिरयानी परोसने जा रही है।

इस खबर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मानो गाय का मांस परोसा जा रहा है न कि भैंस का। शाम तक कैंटीन के ‘मेनू कार्ड की फोटो भी सोशल मीडिया पर छा गई। फिर क्या था दक्षिणपंथी संगठन मैदान में आ गई और विश्वविद्यालय को बदनाम करने में लग गईं। साथ ही साथ कैंटीन ठेकेदार के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगीं।

दक्षिणपंथी संगठनों और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने मांग की कि मेडिकल कॉलेज की कैंटीन ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस का कहना है कि मामले की छानबीन की जा रही है।

भाजपा मेयर शकुंतला भारती ने मांग की कि जिला प्रशासन मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। जब यह खबर फैली तो विश्वविद्यालय प्रॉक्टर एम मोहसिन खान के नेतृत्व में एएमयू के वरिष्ठ अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज की कैंटीन का दौरा कर निरीक्षण किया।

एएमयू के प्रवक्ता राहत अबरार ने कहा कि यह संस्था को बदनाम करने के लिए प्रचार है। मैं विश्वास से कह सकता हूँ कि जिस गोमांस बिरयानी की बात हो रही है, वह भैंस का मांस है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कैंटीन का ठेका 23 फरवरी को समाप्त हो रहा है और ठेका पाने की चाह रखने वाले कुछ स्वार्थी तत्वों ने यह अफवाह उड़ाई है कि गाय का मांस परोसा जा रहा है।

राहत अबरार ने आरोपों को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि एएमयू वह पहली जगह है, जिसने एक सदी पहले ही अपने परिसर में गोमांस पर प्रतिबंध लगा दिया था। उन्होंने कहा कि एएमयू शायद उच्च शिक्षा का पहला शैक्षिक संस्थान है, जहां एक सदी से संस्थान के परिसर में गोमांस के उपयोग के निषेध है।

उन्होंने कहा कि मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, जो बाद में चलकर 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना, के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने 1884 में एक स्पष्ट आदेश जारी किया था कि न केवल किसी भी भोजन कक्ष में गोमांस परोसने जाएगी, बल्कि बकरा ईद के मौके पर संस्था से जुड़े मुलज़मीन गाय बलिदान नहीं करेंगे।

राहत अबरार के अनुसार सर सैय्यद अहमद ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह हिंदुओं की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे और इस आदेश का उल्लंघन करने वाली संस्था के एक कर्मचारी को 1884 में बर्खास्त कर दिया गया था।

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