हौसले को सलमा,मुस्लिम महिला दोनों पैरों से विकलांग मगर प्रथम श्रेणी की बनी डॉक्टर

मुंबई: अगर हौसला जवां हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। रेल हादसे में दोनों पैर खो देने वाली एक लड़की ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। भले ही भाग्य जावेद का साथ न दिया हो, लेकिन उसने अपनी मेहनत से एमबीबीएस परीक्षा में नुमाया कामयाबी हासिल करके यह साबित कर दिया है कि कठिनाइयों चाहे कितनी भी हो, लेकिन अगर प्रतिबद्धता है तो मंजिल मिल ही जाती है ।
टाइम्स ऑफ ांडयाडाट काम की एक खबर के अनुसार 23 वर्षीय रोशन जावेद ने 2008 में जोगेशरी ट्रेन दुर्घटना में अपने दोनों पैर गनवादए थे। दुर्घटना के बाद न केवल मझज़ोरपन ने अपने रास्ते में बढ़ाएं निरोधक कीं, बल्कि नौकरशाही और नियमों ने भी डॉक्टर बनने की राह में मुश्किलें पैदा कर दीं। कानून के अनुसार 70 प्रतिशत तक विकलांग होने पर ही मेडिकल की पढ़ाई की जा सकती है,लेकिन 88 प्रतिशत तक विकलांग चुकी थी मीडीकल परीक्षा पास करने के बाद भी जब उसे दाखिला नहीं मिला, तो वह उसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

रोशन जावेद शुरू से ही बहुत बुद्धिमान छात्रा थीं। 2008 में उसने दसवीं में 92.15 प्रतिशत संख्याओं लेकर नुमाया सफलता हासिल की, लेकिन इसी साल दुर्घटना के कारण वह लगभग पूरी तरह अपंग हो गई। 16 अक्टूबर को भीड़ की धक्का-मुक्की में वह ट्रेन की चपेट में आ गई थी।

रोशन जावेद के सपने को साकार करने में कई लोगों ने उसकी मदद की। रोशन के अनुसार सर्जन डॉ। संजय कनथारिया ने मेरी बहुत मदद की। उन्होंने अपनी बेटी की तरह मेरा ख्याल रखा। दुर्घटना के बाद मैं घर पर पढ़ाई की और बोर्ड ाीगज़ाम दिए। मैं मेडिकल परीक्षा में सफलता प्राप्त की और उसके बाद मेडिकल परीक्षण के लिए मुझे भेजा गया।
मुझे प्रवेश नहीं दिया गया क्योंकि 88 प्रतिशत विकलांग थी। डॉक्टर संजय कनथारिया मुझे कोर्ट जाने की सलाह दी। एक वरिष्ठ वकील वीपी पाटिल ने मेरे मामले की फीस लिए बिना लड़ा।

रोशन का कहना है कि कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि जब यह लड़की दैनिक कोर्ट आ सकती है, तो आप को क्यों लगता है कि वह कॉलेज नहीं आ पाए जाएगा। इस का कॉलेज पास कोई जवाब नहीं था।

गौरतलब है कि जावेद चार बहनों में तीसरे नंबर पर है। उसके पिता इस्माइल यूसुफ कॉलेज के पास सब्जी बेचते हैं। अब रोशन पीजी कोर्स करने की तैयारी में है।

इस अवसर पर रोशन की मां ने कहा कि दुर्घटना के बाद हम पूरी तरह टूट गए थे, हम बहुत गरीब लोग हैं, इस घटना ने हमारी जिंदगी बदल दी थी, हमें नहीं पता था कि क्या होगा, अल्लाह और उन सभी लोगों को धन्यवाद जिन्होंने ने मदद की। न्यूज़ १८

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