पति पत्नी का जीवन कैसा होना चाहीए सीखना चाहते हैं तो हज़रत मुहम्मद स.और खदीजा र. की जिंदगी सीखें

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विशेष लेख राजीव शर्मा कोलसया ……………. खदीजा (रजि.) आदर्श धर्मपत्नी थीं। वे आपकी जरूरतों और अपनी जिम्मेदारियों का पूरा खयाल रखतीं। मुहम्मद (सल्ल.) भी पति के सभी दायित्व निभाते। गृहस्थ जीवन में उनके गुणों और तौर-तरीकों के आधार पर इतिहासकारों ने उन्हें मिसाली शौहर माना है।

यूं तो आप (सल्ल.) एकांतप्रिय थे, विवाह के बाद भी चिंतन-मनन का क्रम चलता रहा, परंतु अब पत्नी के कारोबार की प्रगति के लिए और मेहनत करते, भरोसेमंद लोगों के साथ मुलाकात करते, उन्हें जिम्मेदारी देते। कोई जरूरतमंद आता तो उसके दुख-दर्द सुनते और भरपूर मदद करते।

वे खदीजा (रजि.) की पसंद का खयाल रखते, उनके व्यापार में वृद्धि की फिक्र करते। दोनों की जिंदगी में एक खास बात थी जिस पर आज लोगों को बहुत गौर करने की जरूरत है। दोनों ही आदर्श दंपत्ति थे और इसलिए थे, क्योंकि दोनों के लिए कर्तव्य पहली चीज थी, अधिकार उसके बाद की।

मुहम्मद (सल्ल.) वे सभी कर्तव्य निभाने में पहल करते जो एक पति के लिए जरूरी होते हैं। उन्हें मिसाली शौहर यूं ही नहीं कहा जाता था। वे अपनी पत्नी के सभी हक अदा करते, उनकी पसंद का ध्यान रखते, उनके स्वभाव को समझते, जब गम की घड़ियां आतीं तो हौसला बढ़ाते। आज महिला अधिकारों की बातें हो रही हैं लेकिन वे उस जमाने में ऐसे महान पति थे जो पत्नी को कारोबार में सफलता के लिए प्रेरित कर रहे थे, उनकी ताकत बनकर खड़े थे।

इसी प्रकार खदीजा (रजि.) आपके मिजाज और पसंद-नापसंद को समझती थीं। वे आपके जीवन को आसान बनाने की कोशिश करतीं। आप सच बोलने वाले थे, दिखावा करना पसंद नहीं था, हंगामे और ऐसी महफिलों से सदा दूर रहते, विवेक को महत्व देते, रिश्तों और कामकाज में ईमानदारी अपनाते।

खदीजा (रजि.) इन सब बातों का ध्यान रखतीं कि उनके पति अपनी पसंद के इस मार्ग पर सहजता से चलें, उन्हें कोई दिक्कत न हो। ये एक पत्नी के दायित्व ही तो हैं। इन्हें समझने की खूबी खदीजा (रजि.) में थी।

जहां पति-पत्नी के रिश्तों में कर्तव्य को प्रधानता दी जाती है, वहां सुख, शांति, प्रसन्नता और सफलता का आगमन होता है। उन्हें एक दूसरे से अपने अधिकार मांगने नहीं पड़ते, छीनने नहीं पड़ते। इससे ठीक उलट जहां पति-पत्नी कर्तव्यों को अलविदा कहकर अधिकारों के पीछे पहले भागते हैं, अपने अहम की दुनिया में ही खोए रहते हैं, एक दूसरे के अधिकारों का सम्मान नहीं करते, वहां विवाह खत्म होता है और विवाद शुरू होता है। यह स्थिति दोनों के लिए ही शुभ नहीं होती।

अधिकारों का महत्व है। उन्हें हम भूल नहीं सकते लेकिन अधिकारों से पहले कर्तव्य आने चाहिए, जैसे हजरत मुहम्मद (सल्ल.) और खदीजा (रजि.) ने कर्तव्यों को अपने वैवाहिक जीवन का आधार बनाया। इन्हीं की तरह लोगों को पहले अपने कर्तव्यों की फिक्र करनी चाहिए। उसके बाद अधिकारों की चिंता करें। यह बात किसी एक के लिए नहीं, दोनों के लिए है।

खदीजा (रजि.) इसीलिए महान पत्नी थीं, क्योंकि उन्होंने संपूर्ण वैवाहिक जीवन में पति से जुड़े अपने कर्तव्यों को प्रधानता दी और मुहम्मद (सल्ल.) इसीलिए महान पति थे, क्योंकि उन्होंने पत्नी के सभी अधिकारों को अपना कर्तव्य समझा तथा उन्हें प्रमुखता से निभाया।

इन दोनों का रिश्ता सिर्फ सऊदी अरब या किसी धर्म विशेष के दंपत्तियों के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। अगर आज लोग रिश्तों में अधिकारों से पहले कर्तव्यों को महत्व देने लग जाएं तो हर रिश्ता और खूबसूरत, मजबूत बने तथा विवादों का अंत हो जाए।

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