आरएसएस का जहरीला गुप्त एजेण्डा है गीता,वेद स्कूल और कॉलेज में,मनुस्मिरिती सविंधान में : राज आदिवाल

bhagwaआरएसएस का एजेण्डा है कि 5 साल मोदी की सरकार रहते संविधान की समीक्षा करके मनुस्मृति को संविधान में जोड़ दिया जाए। इसमें सबसे पहले सरकार भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाएगी। भगवत गीता को पढाई के सिलेबस में लागू करेगी। उसी आधार पर मनुस्मृति को सर्वोच्च दर्जा देकर धर्म निरपेक्षता की जगह वर्ण व्यवस्था कायम करेगी। इससे पहले आरक्षण की समीक्षा करके आरक्षण समाप्त किया जाएगा। वो सभी पद अनुसूचित जातियों, जनजातियों, पिछड़ों, महिलाओं, माइनर कम्यूनिटी (मुस्लिम, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई आदि) से छीन लिए जाएंगे। सभी का कार्य योग्यता नहीं बल्कि जन्म आधारित जाति के आधार पर होगा।

मनुस्मृति की चतुर्वर्ण प्रणाली के आधार पर कार्य विभाजन रहेगा। ब्रहाम्णो के लिए पूजापाठ पर पूर्णतः आरक्षण रहेगा। अन्य सभी वर्गों के लोग ब्रहाम्णो को धन, सम्पदा, जमीन, जायदाद, लडकियाँ आदि दान में देंगे। सिर्फ क्षत्रिय (राजपूत) वर्ग ही सेना, पुलिस आदि अन्य सैन्य बलों, अर्द्ध सैन्य बलों में कार्यरत होगा। छोटी-बड़ी दुकान आदि कर अपना गुजारा कर रहे और मध्यम वर्ग व महनत के बल पर बडे व्यापारी बने लोगों से सब हडप लिया जाएगा वह भी सरकार व अदालत के आदेशों पर। इस तरह व्यापार करने का अधिकार सिर्फ वैश्य (बनिया) वर्ग को ही होगा।।

बाकी बचे शुद्र। शुद्र वर्ण में वे सभी लोग हैं जो उनके कर्म के आधार पर हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार और आचार्य मनु के निर्देशानुसार कई अनेक जातियों में विभाजित किए गए हैं। इसी अनुसार नाई केवल बाल काटेंगे, गूजर दूध उत्पादन करेंगे, चमार सभी के मरे हुए पशुओं को उठाएंगे, पशूओ की खाल उतारेंगे, भंगी सभी की गन्दगी उठाएंगे आदि आदि जिन जातियों का वर्णन प्राचीन काल में नहीं मिलता ऐसी जातियाँ जो शु्र वर्ण की ही पैदाईश हैं परन्तु समय के साथ विकसित हुई, संविधान लागू होने के बाद जिन्हें अधिकार मिले परन्तु उन जातियों का कोई पुख्ता इतिहास नहीं मिलता ऐसी जातियों को समाप्त करके उन्हें “कल्कि वर्ण” का नाम देने की योजना है। यह वर्ण कलयुग में उत्पन्न हुआ वर्ण होगा।

पुराणों के अनुसार जब कलयुग चरम पर होगा तब धरती पर भगवान विष्णु का अवतार जन्म लेगा उसे “कल्कि भगवान” के नाम से जाना जाएगा वह युद्ध लडेगा और पूरे विश्व में हिन्दू सनातन धर्म को स्थापित करेगा। उपरोक्त लिखे गए “कल्कि वर्ण” में अहीर, जाट, सुनार आदि जातियों को शामिल करने की योजना है। इस कल्कि वर्ण का काम होगा कल्कि भगवान के आगमन के लिए स्वागत की तैयारियाँ कराना, हथियार एकत्र करने में सहयोग करना, हथियार बनाना, जमींदारों की जमीनों पर किलों का निर्माण करना, सभी उच्च वर्गों के ऐश्वर्य, सुख के लिए सुन्दर स्त्रियों, मदिरा, माँस आदि का प्रबंध करना आदि। जिसका पूरा विवरण जल्द ही समाचारपत्रों में पढने को मिलेगा। महिलाओं पर पूर्णतः पाबंदी लगाकर गुलाम बनाकर रखा जाएगा। मुसलमानों, बौद्धों, जैनियों, खालसा पंथियों, ईसाइयों की हत्या करके उन्हें जड-मूल से समाप्त कर दिया जाएगा।

ऐसा ऐजण्डा भारत की मोदी सरकार और आरएसएस का है। जो कल्कि भगवान के पूरे विश्व में आक्रमण और पूरे विश्व में हिन्दू सनातन धर्म के प्रसार और पूरे विश्व को गुलाम बनाने के बाद ही यह ऐजेण्डा पूरा होगा। संविधान समीक्षा के समय कानूनों को बदलने के साथ-साथ राष्ट्रपति की चयन प्रक्रिया बदलली करने की भी योजना है, इस योजना के अनुसार राष्ट्रपति पद पीठ के शंकराचार्य के लिए आरक्षित किया जाएगा। वर्तमान में शंकराचार्य का पद राष्ट्रपति के पद से भी बड़ा माना जाता है जोकि बेशक संवैधानिक नहीं है परन्तु भारत के राष्ट्रपति अनेकों बार गद्दीनशीन शंकराचार्य के कदमों में झुकते देखें गए हैं। इसी प्रकार न्यायपालिका को सरकार के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा और मनुस्मृति, वेदों के कानून लागू किए जाएंगे। (जनउदय)

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