कट्टर धार्मिक होती राजनीतिक पार्टियां,इस में भारत वासियों का कितना फायदा ? : विशेष लेख

kattar
( सदा ए भारत वशेष )प्रिय पाठकों आज जो लेख लिख रहा हूं उस से किसी समुदाय जाति को अपमानित करने का मेरा मक़सद नहीं है । सिर्फ आगामी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों द्वारा मतदाताओं को जाति, समुदाय के नाम पर भड़काकर वोट बटोरने की नीति को आपके समक्ष रखने का है आपको सचेत करने का है ताकि आप इनके झांसे में ना आकर अपने विवेक से प्रदेश और देश हित के लिए मतदान करें।

कट्टर धार्मिक होना कोई गुनाह नहीं है क्योंकि हर धर्म सदभाव और भाई चारे की बात करता है, दिक्कतें जब शुरू होती हैं जब राजनेता और राजनीतिक पार्टियों हम भारतवासियों को जाति धर्म समुदाय के नाम पर बांटती हैं । दरअसल वह लोग वोट बटोरने के लिए जानवरों जैसा झुंड तैयार करते हैं ताकि वह अपनी प्रशासनिक विफलता को जाति धर्म समुदाय के आड़ में फिर सत्ता पर क़ाबिज हो जाऐं उन्हें आपको हो रही कठिनाइयों भ्रष्टाचार, मंहगाई, अदि से कोई सरोकार नहीं ।

भारत देश हमारा एकता और अखंडता के कारण ही सबसे प्रिय है, यहाँ हर धर्म समुदाय जाति के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं । हम सब की समस्याएं लगभग एक समान हैं । हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सबको मंहगाई भ्रष्टाचार से कठिनाई होती है। सबको साथ लेकर हर धर्म समुदाय जाति की उन्नति से ही यह देश ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है । यह इस देश की वास्तविकता है, अगर कोई राजनेता या राजनीतिक दल सिर्फ किसी विशेष समुदाय जाति की उन्नति की बात करता है तो वह भारत की वास्तविकता को नहीं समझता वह सिर्फ अपने निजी स्वार्थ की बात करता है ।

हमें राष्ट्र निर्माण के लिए सब के हितों को देखना चाहिए, राष्ट्रीय एकता ही राष्ट्र को सशक्त एवं संगठित बनाती है, राष्ट्रीय एकता ही वह भावना है जो विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जाति, वेश-भूषा, सभ्यता एवं संस्कृति के लोगों को एक सूत्र में पिरोए रखती है। अनेक विभिन्नताओं के उपरांत भी सभी परस्पर मेल-जोल से रहते हैं । हमारा भारत देश राष्ट्रीय एकता की एक मिसाल है ।

जितनी विभिन्नताएँ हमारे देश में उपलब्ध हैं उतनी शायद ही विश्व के किसी अन्य देश में देखने को मिलें । यहाँ अनेक जातियों व संप्रदायों के लोग, जिनके रहन-सहन, खान-पान व वेश-भूषा पूर्णतया भिन्न हैं, एक साथ निवास करते हैं । जब तक किसी राष्ट्र की एकता सशक्त है तब तक वह राष्ट्र भी सशक्त है । बाह्य शक्तियाँ इन परिस्थितियों में उसकी अखंडता व सार्वभौमिकता पर प्रभाव नहीं डाल पाती हैं परंतु जब-जब राष्ट्रीय एकता खंडित होती है तब-तब उसे अनेक कठिनाइयों से जूझना पड़ता है । हम यदि अपने ही इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो हम यही पाते हैं कि जब-जब हमारी राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ी है तब-तब बाह्य शक्तियों ने उसका लाभ उठाया है और हमें उनके अधीन रहना पड़ा है ।

हमारी राष्ट्रीय अवचेतना से ही हमें वर्षों अंग्रेज़ों की दासता ( गुलामी) से मुक्ति मिल सकी है ।  भारत जैसे विकासशील देश के लिए जो वर्षों तक दासत्व का शिकार रहा है वहाँ राष्ट्रीय एकता की संपूर्ण कड़ी का मजबूत होना अति आवश्यक है ताकि भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति न हो सके ।

देश में व्याप्त सांप्रदायिकता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रीयता आदि सभी राष्ट्रीय एकता के अवरोधक तत्व हैं । ये सभी अवरोधक तत्व राष्ट्रीय एकता की कड़ी को कमजोर बनाते हैं । इन अवरोधक तत्वों के प्रभाव से ग्रसित लोगों की मानसिकता क्षुद्र होती है जो निजी स्वार्थ के चलते स्वयं को राष्ट्र की प्रमुख धारा से अलग रखते हैं तथा अपने संपर्क में आए अन्य लोगों को भी अलगाववाद के लिए उकसाते हैं । यही आगे चलकर लोगों में विघटन का रूप लेता है जो फिर खून-खराबे, मारकाट व दंगों आदि में परिवर्तित हो जाता है।

इन विघटनकारी तत्वों की संख्या जब और अधिक होने लगती है तब ये पूर्ण अलगाव के लिए प्रयास करते हैं । आज़ादी प्राप्ति के पश्चात पाकिस्तान का जनम अलगाववादी नीतियों का ही नतीजा था।  देश की एकता के लिए आंतरिक अवरोधक तत्वों के अतिरिक्त बाह्य शक्तियाँ भी बाधक बनती हैं । जो देश हमारी स्वतंत्रता व प्रगति से ईर्ष्या रखते हैं वे इसे खंडित करने हेतु सदैव प्रयास करते रहते हैं । कश्मीर की हमारी समस्या इन्हीं प्रयासों की उपज है जिससे हमारे देश के कई नवयुवक दिग्भ्रमित होकर राष्ट्र की प्रमुख धारा से अलग हो चुके हैं ।

भारत एक महान, स्वतंत्र एवं प्रगतिशील राष्ट्र है । राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी क्षुद्र मानसिकता से स्वयं को दूर रखें तथा इसमें बाधक समस्त तत्वों का बहिष्कार करें । हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम चाहे जिस क्षेत्र, प्रांत, जाति या समुदाय के हैं परंतु उससे पूर्व हम भारतीय नागरिक हैं । भारतीयता ही हमारी वास्तविक पहचान है । चुनाव हमारे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए आम जनता को शासन में भागीदारी दिलाने के लिए कराए जाते हैं ।

ऐसे में हम सब धर्म समुदाय जाति की राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करें ताकि कल अगर कोई समस्या या कठिनाई हो तो इन सत्ताधारियों से हम सब मिलकर हिसाब ले सकें। क्योंकि जो भी सार्वजनिक चीजें अस्पताल, स्कूल, सड़कें, आदी बनाई जाती हैं यह सब हम करीब जनता के पैसों से बनती हैं और हम सब जानते हैं इन सब में कितनी अनियमितताएँ, भ्रष्टाचार, धांधली होती है, फिर भी हम कुछ नहीं कर पाते कारण बस एक होता है क्योंकि हम धर्म समुदाय जाति के नाम पर बटकर किसी ना किसी राजनीतिक दल के भक्त बन चुके होते हैं हमें फिर कुछ नहीं दिखता।

इसलिए हम अपने विवेक से स्वयं तथा अपने संपर्क में आने वाले समस्त व्यक्तियों को भी इसके लिंए प्रेरित करें कि इस बार हम धर्म समुदाय जाति के नाम पर मतदान नहीं करेंगे और हम इन कट्टर धार्मिक राजनीतिक दलों के झांसे में नहीं आऐंगे जो हमारी भावनाओं से खेलकर हम पर राज करते हैं ताकि भविष्य किसी को इन राजनेताओं के भ्रष्टाचार के कारण किसी को अपने बीवी का शव कंधे पर लेकर 13 कि मि. ना चलना पड़े। ताकि किसी की सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के कारण मृत्यु ना हो, ना ही खराब सड़कों के कारण किसी का जान माल का नुकसान हो आदि जब हम एक रहेंगे तभी सबकी जवाब दही तय होगी अन्यथा यह हमेशा ऐसे ही देश की संपत्ति लूटते रहेंगे और हम यूं ही जाति धर्म समुदाय के नाम पर बंटे रहेंगे और हमारी समस्याएं और विकराल रूप धारण कर लेंगी और ऐसे ही पिसते रहंगे।  हमारी राष्ट्रीय एकता युग-युगांतर तक बनी रहे । इसके लिए जरूरी है कि हम विघटनकारी तत्वों को राष्ट्रीय एकता की मशाल जलाकर भस्मीभूत करें । हम एक थे एक हैं और सदा एक बने रहेंगे ।

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