एमसीडी ने बीजेपी नेता विजय गोयल को फ़ायदा पहुंचाने के लिए कुल 25 करोड़ का टैक्स माफ़ किया

नई दिल्ली ( सदा ए भारत डेस्क ) दिल्ली में जहां एमसीडी फंड की कमी होने का बहाना बनाकर अपने कर्मचारियों को तरख्वाह नहीं देती है वहीं वो दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को टैक्स में फ़ायदा पहुंचा रही है। इसका एक और उदाहरण हाल ही में सामने आया है जब कर्ज़ में डूबी नॉर्थ एमसीडी ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्र में मंत्री विजय गोयल को नियमों के विरुद्ध जाकर प्रॉपर्टी टैक्स में फायदा पहुंचाया और कुल मिलाकर 25 करोड़ रुपए का नुकसान उठाया। अपने राजस्व का यह नुकसान एमसीडी उस स्थिति में कर रही है जब वो कुल 2700 करोड़ रुपए के कर्ज़ में डूबी है। आपको बता दें कि दिल्ली के धर्मपुरा इलाके में केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने एक हैरीटेज बिल्डिंग खरीदी थी और उस हवेली पर लगने वाले टैक्स को बीजेपी नेता विजय गोयल ने अपनी उंची पहुंच का इस्तेमाल करके एमसीडी से माफ़ करा लिया। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री विजय गोयल को फायदा पहुंचाने के लिए एमसीडी ने अपनी टैक्स माफ़ी का दायरा बढ़ाते हुए 750 मकानों का कुल 25 करोड़ रुपए का टैक्स माफ़ किया और अपना नुकसान किया।

इस मुद्दे पर पार्टी कार्यालय में हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि ‘जिस तरह खेल मंत्री विजय गोयल ओलम्पिक में देश और अपनी पार्टी की फज़ीहत कराके आए हैं उसके बदले में शायद उनकी पार्टी ने उन्हे प्रॉपर्टी टैक्स में फायदा पहुंचाकर एक ईनाम दिया है। भारतीय जनता पार्टी में अपनी ऊंची पहुंच का इस्तेमाल करके खेल मंत्री विजय गोयल ने पहले तो सिर्फ़ अपनी हेरीटेज बिल्डिंग का टैक्स नॉर्थ एमसीडी से माफ कराया। फिर जब इसका एमसीडी के अंदर भी विरोध होने लगा तो उसके बाद जितना विवेक विजय गोयल में बचा है उसके आधार पर उन्होने एमसीडी से उस पूरे इलाके के ही प्रॉपर्टी टैक्स समेत तमाम टैक्स माफ़ करा दिए जिसके दायरे में कुल 750 इमारतें आ गईं और माफ़ होने वाला टैक्स बना कुल 25 करोड़ रुपए। ऐसा उन्होने इसलिए किया ताकि वो यह कह सकें कि और भी 749 घर ऐसे हैं जिनका टैक्स माफ़ हुआ है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री ने सिर्फ अपने फायदे के लिए कर्ज़ में डूबी एमसीडी को 25 करोड़ का नुकसान करा दिया और एमसीडी ने उनके कहने पर ऐसा कर भी दिया। फंड की कमी होने का बहाना बनाकर नगर निगम अपने सफ़ाईकर्मियों को तरख्वाह नहीं देती है, शहर में साफ़-सफ़ाई नहीं हो पाती, एमसीडी इन सबके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर लगने वाले टैक्स का बड़ी शिद्दत से ध्यान रखती है और उसे माफ़ करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया जाता है। दिल्ली के लोग चाहें बेशक कूड़े के ढेर पर रहें, चाहे दिल्ली में डेंगू,चिकनगुनिया या फिर मलेरिया फैले, एमसीडी चाहे बेशक 2700 करोड़ रुपए के कर्ज़ में डूबी रहे लेकिन उससे बीजेपी शासित एमसीडी को कोई फर्क़ नहीं पड़ता। एमसीडी के लिए बस बीजेपी नेताओं को टैक्स में फायदा होना चाहिए और इस बात का एमसीडी पूरा ख्याल रखती है। इस संदर्भ में आम आदमी पार्टी कुछ सवाल बीजेपी और केंद्र सरकार की जांच ऐजेंसियों के समक्ष रख रही है।
1. कानून के विरुद्ध जाकर करोड़ों रुपए की यह टैक्स माफ़ी कराना क्या आर्थिक अपराध की श्रेणी में नहीं आता ?

2. केंद्र सरकार के मातहत आने वाली जांच ऐजेंसियां और भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाएं क्या इस आर्थिक अपराध का संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई करेंगी ?

3. इस मामले में एक निष्पक्ष जांच के लिए विजय गोयल अपने पद से इस्तीफ़ा दें

4. विजय गोयल के इस्तीफ़ा ना देने की स्थिति में क्या भारतीय जनता पार्टी अपने इस नेता पर कोई कार्रवाई करेगी ?

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