शरीअत हमारी पहचान है, हम जीवित रहेंगे तो शरीअत पर, मरेंगे भी तो शरीअत पर : ओवैसी

हैदराबाद। हैदराबाद से सांसद व मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन के रिस्ट्रिया अध्यक्ष असद ओवैसी ने कहा कि रमजान की तरह रबीउल अव्वल की भी बड़ी पुण्य है। अगर रमजान में कुरान नाज़िल किया गया तो रबी उल अव्वल में साहिबे कुरान दुनिया में तशरीफ़ लाए। अगर इस दुनिया में रसूले अकरम की तशरीफ़ आवरी न होती तो न कुरान मिलता ‘न रमज़ान मिलता’ न कोई पूजा हमें प्राप्त होती।

उन्होंने कहा कि हुज़ूर अकरम के उपयोगकर्ता मुबारक सम्मान से गुनाहगारों को भी माफी मिलती है। इस सिलसिले में उन्होंने विभिन्न घटनाओं का भी हवाला दिया। । उन्होंने सभा के प्रधान घर दारुस्सलाम में कल रात आयोजित सभा को संबोधित करते हुए। उन्हों ने कहा कि अब समय आ गया है कि मुसलमान अपने इस्लामी भूमिका का प्रदर्शन और गरीबों व जरूरतमंदों की मदद करें। हुज़ूर अकरम ने हमें इस बात की शिक्षा दी है कि निर्बलों और मज़लूमों का साथ दें और उनके साथ सहयोग करें। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को जरूरत नहीं है कि वह औरों के मार्ग पर चलें।  सदर मजलिस ने कहा कि नोट नंदी के बाद अब नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के एक मंत्री नसबंदी की बात कर रहे हैं, जबकि आरएसएस प्रमुख हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।

सरकार हर मोर्चे पर विफल है इसलिए इस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार यह चाहती है कि नोट बंदी के ज़रिए भारत में क्रांति लाये लेकिन इस तरह से भारत में क्रांति नहीं होगा। वर्तमान शासक कल के वश होंगे। ओवैसी ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि वह पुराना शहर हैदराबाद के एक एटीएम के पास आकर जनता से यह बात कहें कि वह देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना चाहते हैं। वह जनता का सामना नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि आज जो लोग कतारों में ठहरने के लिए मजबूर हैं ‘चुनाव के दिन भी वे पंक्तियों में आएंगे और सरकार को सबक सिखाएंगे क्योंकि सरकार के इस क्रूर कदम 3 प्रतिशत विकास (जीडीपी) प्रभावित होने की संभावना है जिसमें से 4 लाख करोड़ रुपये के सफल घरेलू उत्पाद में कमी आएगी और 50 दिन में एक लाख 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर के बाद पेट्रोल 30 रुपये ‘डीजल 25 रुपये और चावल 5 रुपये किलो हो जाएंगे? । अगर ऐसा नहीं होगा तो अर्थव्यवस्था को कैसे सुधारा जायेगा।

सदर मजलिस ने कहा कि सुधीर आयोग ने अपनी रिपोर्ट दे दी है जिसके अनुसार 33 प्रतिशत मुसलमान बच्चे स्कूल नहीं जाते। सरकार निवास स्कूल्स स्थापित कर रही है जिस वृद्धि की जरूरत है। नौकरियों में मुसलमानों का अनुपात केवल 7 प्रतिशत है जबकि उनकी आबादी 13 प्रतिशत है। इस लिहाज से मुसलमानों को नौकरियों में भी उचित हिस्सा मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम हमारा धर्म दूसरों से सीखने की जरूरत नहीं ही व्यवस्था हमारी पहचान है। व्यवस्था में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम जीवित रहेंगे तो व्यवस्था पर और मरेंगे भी तो व्यवस्था पर.दनिया की कोई ताकत हमें व्यवस्था का पालन करने से नहीं रोक सकती। ओवैसी ने कहा कि नमरूद ‘फिरौन’ यज़ीद जैसे कई शासक आए और चले गए ‘वह अपने घमंड एजेंडा में सफल नहीं हुए। वर्तमान सरकार और सत्तारूढ़ भी खत्म हो जाएंगे क्योंकि उनके पॉप से गड्ढे भर चुका है। असद ओवैसी ने कहा कि ढाई साल बाद देश में अच्छी बारिश हुई और फसलें काटने का समय है ‘शादियों का सीजन है’ ऐसे अवसर पर अचानक बंदी की वजह से ९६ % घरों की हालात खराब हो गयी है

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