JNU : कुलपति ने फिर मुस्लिम,दलित छात्रों को दिखाया संघी चेहरा, हक़ की आवाज़ज़ बुलंद करने पर किया निष्काषित

नई दिल्ली : जेएनयू पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि इस संस्थान में भी दलित-पिछड़े और आदिवासी तथा मुस्लिम छात्रों के साथ भेदभाव होता रहा है. जिसे लेकर समय-समय पर यहाँ के छात्र आन्दोलन भी करते रहे हैं. बताते चलें कि पिछले तीन दिनों से दलित,पिछड़े, आदिवासी, मुस्लिम, छात्र अपने हक के लिए आन्दोलन कर रहे थे. जिसको कि जेएनयू प्रशासन ने फिजिकल वायलेंस और मीटिंग को डिस्टर्ब करने के आरोप में बारह मुख्य छात्रों को निष्काषित कर दिया है।
नेशनल दस्तक के अनुसार, मामला ये है कि जेएनयू में एमफिल और पीएचडी के इंट्रेंस एग्जाम में सत्तर नंबर रिटेन के हैं और तीस वाइबा के छात्रों का आरोप है कि जो भी दलित- पिछड़े छात्र रिटेन पास करके वाइबा तक पहुँचते हैं उन्हें वाइबा में इतना कम नंबर दिया जाता है कि वह प्रवेश ही नहीं पा सकते हैं। यही नहीं छात्रों का यह भी आरोप है कि बाद में इन सीटों पर सवर्ण जाति के छात्रों को प्रवेश दे दिया जाता है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर तमाम संगठन और दलित, पिछड़े, आदिवासी, मुस्लिम छात्रों ने आज वीसी ऑफिस का घेराव किया. और वीसी से मिलने की मांग कर रहे थे. साथ ही वो एसी मीटिंग को दुबारा बुलाने के लिए भी प्रस्ताव रख रहे थे. उनका कहना था कि इन सभी मुद्दों पर दुबारा से विचार किया जाना चाहिए.

बता दें कि दलित- पिछड़े छात्रों के इस आरोप का खंडन के लिए जेएनयू प्रशासन अब्दुल नाफे नामक कमेटी का गठन किया था. जिसने अपनी रिपोर्ट में यह साफ़ किया कि छात्रों का आरोप सही है और वाइबा के द्वारा दलित, पिछड़े छात्रों के साथ भेदभाव होता है

गौरतलब है कि जेएनयू प्रशासन को छात्रों द्वारा पिछले तीन दिनों से चल रहे आन्दोलन का संज्ञान लेना चाहिए लेकिन उन्होंने इसके बजाय आन्दोलन में शामिल बारह मुख्य छात्रों को निष्काषित कर दिया है, साथ ही जांच कमेटी बिठाने की बात कही गई है. भेजे गए नोटिस में उनके निष्कासन का कारण प्रशासन ने एसी मीटिंग में छात्रों द्वारा फिजिकल वायलेंस और मीटिंग को डिस्टर्ब करना बताया है.

निष्कासित हुए सभी छात्र दलित, पिछड़े, मुस्लिम और आदिवासी हैं. जबकि पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से बहुजन छात्रों पर एकेडमिक हमले हुए हैं उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि देश अभी भी जातिवाद के दंश से बाहर नहीं आ पाया है. और इसका असर उच्च शिक्षण संस्थानों में भी दिखाई दे रहा है।

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