सहारनपुर हिंसा : शहर सुलगतरा रहा और तारिख बदलती रहीं

सहारनपुर ( एस.बी.डेस्क ) 5 मई को सहारनपुर में महाराणा प्रताप की जयंती के दिन शुरू हुआ विवाद इतिहास में परिवर्तन के साथ अधिक भयानक मोड़ लेता चला गया। प्रतिमा पर पुष्पांजलि पोशी और डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद जातीय हिंसा में बदल गया।

इस हिंसा में पूरा जिला सुलग उठा और राजनीतिक दलों को राजनीतिक रोटियां सेंकने का भी मौका मिला। सरकार ने अधिकारियों के तबादले कर दिए, लेकिन सहारनपुर के हालत नहीं बदले। बस रूपांतरण हुवा तो केवल हिंसा की तिथियाँ।

सहारनपुर हिंसा: कब कब क्या हुआ?

पांच मई को हिंसा शुरू जिले के शबयरिपोर गांव में महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर चादर चढाने जा रहे राजपूतों और दलितों के बीच झड़प हुआ। इस हिंसा में राजपूत के एक युवा की मौत हो गई। इसके बाद ठाकुरों ने बदला लेने के लिए 60 दलितों के घर जला दिए। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके 17 लोगों को गिरफ्तार किया।

नौ मई : भीम सेना के नेतृत्व में प्रभावित दलितों ने मुआवजे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया, जिसके दौरान फिर हिंसा भड़क उठी। बदमाशों ने कई स्थानों पर आगजनी की। दो पुलिस चौकियों को भी जला दिया गया। इस सिलसिले में 24 मामले दर्ज कर 30 लोगों को गिरफ्तार किया।
इक्कीस मई: बड़ी संख्या में दलितों ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध किया।
तेईस मई : मायावती के दौरे से पहले शबयरिपोर में आगजनी और पथराव के बाद कई स्थानों पर जमकर हिंसा हुई।

तेईस मई : मायावती की रैली से लौट रहे लोगों पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया, जिसमें एक की मौत हो गई और 10 से अधिक घायल हो गए। इस सिलसिले में 25 गिरफ्तार किए गए।

चौबीस मई : अज्ञात हमलावर ठाकुर समुदाय के एक व्यक्ति को गोली मार कर फरार हो गए। इसके बाद एसएसपी और डीएम को निलंबित कर दिया गया।

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