दौरे बातिल में हक़परस्तों की बात रहती है सर नहीं रहते

नई दिल्ली ( एस.बी.विशेष ) एलेक्ट्रानिक मीडिया एनडीटीवी पर सरकारी कार्रवाई यह दर्शाता है कि वह पत्रकारिता के सबसे ऊंचे पायदान पर है । एनडीटीवी को इसके लिए ढेरो बधाई क्योंकि इस युग में जहां सब गोदी में खेल रहे है वह अकेले सरकार से सवाल पूछ रहा है ।

उसके एंकरों रिपोर्टरों में यह साहस तो है कि वह आम जन से किए गए सरकार के झूठे वादों की पोल खोल रहे हैं । चुनाव पूर्व आज सत्ता में बैठे लोग ही कह रहे थे कि हर महीने हम अपने किए गए वादों और उनको पूरा करने का हिसाब जनता को देंगे।
तो आज सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने पर आजाद आवाज को दबाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है ?  दरअसल आज कल लोकतंत्र नहीं मुठ्ठी भर भीडतंत्र का युग है जिस कारण आजाद आवाज दबाई जा रही है जगह जगह पीट पीट कर मार दिया जा रहा है बलात्कार हो रहे हैं।

और इसके जिम्मेदार वह बिके हुए भीडतंत्र के गुंडे ही नहीं आप सब हैं। आप सब अपनी अपनी झोपड़ी बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। याद रखना सबके सब तोड़ दिए जाओगे।आज कहां वह पार्टियां या उनके नेता और समर्थक जो कल तक ईवीएम का रोना रो रहे थे। जो कहते थे 70% जनता वर्तमान सरकार के विरूद्ध है। वह 70% जनता कौनसी थी क्या सब भीडतंत्र से डर गए ? कमाल है 30% ने 70% को डरा रखा है ।

उन तमाम बैसाखी वाली पार्टियों उनके नेताओ समर्थकों से कहना चाहता हूं कि यह बेइमानी से चुनाव जीतने और दूसरे आरोप बंद कर दीजिए आप लोगों के पास कोई सपोर्ट नहीं है। यह मान लीजिए जनता ने आप जैसे नेतृत्व वाले डरपोक नेताओं का समर्थन करना बंद कर दिया है। आप लोग आरोप लगाते हैं देश का मीडिया सत्ता के हाथों बिक चुका है यह आरोप आप लोगों का झूठा है क्योंकि मीडिया बिका नहीं है आपने उसे बिकने पर मजबूर किया है।

जो बचे हैं वह भी बिक जाऐंगे या डरा दिए जाऐंगे अकेला कब तक कोई लडता रहेगा। आप लोग मीडिया पर आरोप लगाते हो निर्लज्जता की निर्लज्ज आप हैं जो अपने प्रवक्ताओं को उन बिके हुए मीडिया चैनलों पर भेजकर खुद से ही अपना मजाक बनवाते हो।

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