हिन्दू,मुस्लिम में नफरत फ़ैलाने वालों के लिए कानपुर की गीता शर्मा अनोखी मिसाल,पाबन्दी से रखती हैं रोज़ा और पढ़ती नमाज़

कानपूर ( एस.बी. टीम ) हिंदू हूँ, लेकिन विश्वास रखती हूँ मोहम्मद पर, कोई अंदाज़ तो देखे मेरी काफिर अदाई का, यह शेर कानपुर की रहने वाली गीता शर्मा पर पूरी तरह सादिक आ रहा है। गीता शर्मा एक हिंदू महिला हैं, लेकिन पूरे व्यवस्था और आस्था व सम्मान के साथ रमजान के उपवास रखती हैं।

गीता शर्मा ने इसके लिए प्रार्थना भी सीखा है। उनके इस अमल को लोग हिन्दू मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय एकता का उदाहरण करार दे रहे हैं।

कानपुर शहर के श्याम नगर क्षेत्र में रहने वाली गीता शर्मा, जो एक हिंदू परिवार में पैदा हुईं और अब एक शादीशुदा जीवन गुज़ार रही हैं, उनके पति प्रमोद शर्मा के कई मुस्लिम परिवारों से बेहतर संबंध हैं, जिनसे प्रभावित होकर गीता शर्मा इस साल रमजान महीने में रोज़ा रख रही हैं।
गीता शर्मा ने रमज़ान के अब तक के सारे रोज़े उसी तरह से करती हैं जैसे आम मुसलमान करते हैं। उनका कहना है कि वह रमज़ान के सभी उपवास रखेंगी।

उन्होंने अपने घर पर काम करने वाली मुस्लिम लड़कियों से नियमित नमाज़ पढ़ना सीखा है और वह समय की पाबंदी के साथ नमाज़ भी अदा करती हैं और इफ्तार भी करती हैं।

उनके पति का कहना है कि पूजा करने में कोई परहेज नहीं होना चाहिए चाहे वह किसी भी रूप में हो। आज समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जो लोगों को बांटने का काम करते हैं, लेकिन हम सब एक ही मालिक के बन्दे हैं।

उधर गीता शर्मा का भी कहना है वह रोज़ भगवान की भी पूजा भी करती हैं और अल्लाह का पूजा भी।

प्रमोद शर्मा के 45 वर्षीय पुराने मुस्लिम दोस्त असद कमाल इराकी का कहना है इस तरह गीता शर्मा मानवता ,मज़हबी भाई चारे के लिए एकता की एक मिसाल पेश कर रही हैं कि देश में रहने वाले हर धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्मों का सम्मान करते हुए मिलजुल कर रहना चाहता है, लेकिन कुछ राजनीतिक शक्तियां उन्हें विभाजित करने की कोशिश में लगी रहती हैं।

मौलाना अब्दुल का कहना है कि ऐसी उदाहरण नफरत का ज़हर फैलाने वाले नेताओं के लिए एक जवाब है और इस देश की धार्मिक एकजुटता वास्तविक तस्वीर पेश करती हैं।

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