इस्लाम का सबक़ अख़लाक़ है प्यार है न्याय है

मदीना मनउवरा ( एस.बी.टीम ) ऑल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के संस्थापक मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ ने कल पवित्र शहर मदीना में ऑल इंडिया उलमा मशाईख बोर्ड के बैनर तले आयोजित उर्स मौला अली करम अल्लाह की मजलिस में बोलते हुए कहा कि बिना अली के कोई भी प्यार मोकम्मल नहीं हो सकता है। यह फरमान रसूल है क्योंकि मोमिन और मुनाफ़िक़ की पहचान ही यही है कि उल्लेख अली जिसका चेहरा खुलता जाए वह मोमिन है और जिसके चेहरे पर मलाल आजाये वह मुनाफ़िक़ है।

हज़रत ने कहा कि अली वह हैं जिनसे मुस्तफा करीम प्यार करते हैं अली वे हैं जिनका चेहरा देखना ईबादत है, अली वह हैं जो बाबुल ज्ञान है, अली वह है जो अल्लाह के शेर हैं, अली साहब जुल्फिकार हैं अली हैं जिनके दर के दान से कोई अभिभावक बनता है जो अली के दरसे भीख न पाए वह वली बन नहीं सकता और अली के मोहब्बत में गिरफ्तार हो वह मुनाफ़िक़ नहीं हो सकता।

हज़रत ने कहा अली ज्ञान के शहर का दरवाजा है ज्ञान शहर तक पहुंचना है तो अली बिना नही पहुँच सकते। उन्होंने कहा कि मौला अलैहिस्सलाम पर हुआ हमला आतंकवाद के इतिहास में पहला आत्मघाती आतंकवादी हमला था और आतंकवाद के पहले शिकार मौला अली करम अल्लाह वजह करीम हुए और आज भी अली का उल्लेख करने वाले आतंकियों के निशाने पर हैं। इस्लाम सबक आचरण है प्यार न्याय है मौला अली का पूरे जीवन रसूल की जीवन का आईना है यानी बोलता कुरान है अली इसीलिए आतंकवाद की निगाहों में खटक गए आज अली वाले भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि हमें अगर सफलता चाहिए तो अली से प्यार अगर दुनिया को शांति चाहिए, आतंकवाद से छुटकारा चाहिए तो प्यार आम करें न्याय से काम लें।

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