पुलिस के खिलाफ धरने को यूपी पुलिस मानती है वर्ग विशेष के खिलाफ

लखनऊ ( एस.बी.टीम ) भोपाल फर्जी मुठभेड़ के विरोध करने और पुलिस द्वारा लाठी चार्ज करने के 2 नवंबर 2016 के प्रकरण पर यूपी पुलिस की नोटिस पर रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, शकील कुरैशी और अनिल यादव ने बयान दर्ज कराया।

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 2 नवंबर 2016 को रिहाई मंच ने भोपाल फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ जीपीओ लखनऊ स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना देने के लिए गए ही थे कि पुलिस ने धरने पर हमला बोलते हुए राजीव यादव और शकील कुरैशी को बुरी तरह से मारते-पीटते हिरासत में लिया और हिरासत के दौरान भी मारा-पीटा। इस पर रिहाई मंच प्रवक्ता अनिल यादव ने हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई थी। जिसपर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पर जिस तरीके से पुलिस ने धरना देने वाले सात नामजद और 400 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर आपराधिक विरोध प्रर्दशन को आपराधिक गतिविधि बनाने की कोशिश की वह साफ करता है कि पुलिस आंदोलन पर आपराधिकरण की मुहर लगाना चाहती है। पुलिस ने दर्ज एफआईआर में कहा है कि प्रदर्शनकारी पुलिस से मारपीट और गाली गलौज करने लगे। जबकि इस घटना के बाद वायरल हुए वीडियो में साफ-साफ आया है कि रिहाई मंच के नेताओं को पुलिस ने घेरकर बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज किया।

मंच प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया उसमें कहा है कि ये लोग वर्ग विशेष के खिलाफ टिप्पणी कर रहे थे जब कि सात नामजद अभियुक्तों में 4 हिंदू व 3 मुसलमान समुदाय से हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दो समुदायों के लोग एक साथ थे तो वे किस समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे थे। दूसरा कि यह धरना भोपाल में मारे गए उन बेगुनाह के समर्थन में था जिन्हें पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मारने का दावा किया था। ऐसे में यूपी पुलिस का यह कहना कि ये लोग वर्ग विशेष पर टिप्पणी कर रहे थे वो साफ करता है कि पुलिस खुद को वर्ग विशेष से जुड़ा मानती है। दूसरे वह सांप्रदायिकता के खिलाफ उठने वाली आवाजों को जब अपने खिलाफ मानती है तो वह साफ करती है कि वह खुद को उन्हीं साप्रदायिक तत्वों की कड़ी मानती है।

रिहाई मचं प्रवक्ता ने कहा कि रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब, शकील कुरैशी और अनिल यादव ने आज उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाया। वहीं उन लोगों ने बयान में यह भी दर्ज करवाया कि पुलिस ने उनका साउंड सिस्टम उठा ले गई थी जिसे उन्होंने अपने एफआईआर में भी दर्ज करवाया था पर पुलिस ने अपने एफआईआर में उसका उल्लेख नहीं किया वह साफ करता है कि पुलिस उसे चोरी से जब्त कर खा गई है।

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