शाएर असरार जामई पेंशन मामिला : जब अवाम के बीच सरकार की होने लगी कीर्किरी तब आए हरकत में

नई दिल्ली ( एस.बी.डेस्क ) उर्दू दुनिया के प्रशिद तंज़ व मज़ाह के शाएर असरार जामई वैसे तो दिल्ली सरकार के दस्तावेज़ में दुनिया से विदा हो चुके हैं लेकिन वास्तव में वह अब भी अस्सी साल की उम्र में जीवित हैं और दिल्ली के जामिया नगर बस्ती में अकेला बीमार व कमजोरी की हालत में जिंदगी गुज़ार रहे हैं।

असरार जामई को अब से चार साल पहले दीक्षित सरकार के समय पंद्रह सौ रुपये मासिक पेंशन मिलता था लेकिन बाद में वह बंद कर दिया गया जब यह पता करने वह गए कि पेंशन क्यों बंद हो गया तो उन्हें बताया गया कि वह हमारे रजिस्टर में मर चुके हैं इस लिए बंद है। उन्हों ने बताया मैं तो सामने खड़ा हूँ लेकिन वह नहीं माने जब से वह आज तक अपने जिन्दा होने का सबूत सरकारी दस्तावेज़ में पेश कर रहे हैं लेकिन वह कामयाब नहीं हुए।
यह बात सोशल मीडिया दुवारा जनता के बीच जब आई और दिल्ली सरकार की किरकिरी होने लगी तब जाकर सरकर हरकत में आई। ऐसा नहीं है की असरार जामई ने यहाँ लोकल विधायक को नहीं बताया सब को बताया था। हरकत में आने के बाद दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंदर गौतम व अन्य अधिकारयों को लेकर जामई के घर पहुंचे उन से मुलाक़ात और उन्हें कुछ डाक्यूमेंट देने के लिए कहा और कहा इसी मंथ के अंत तक पेंशन आप का चालू होजाए गा।

असरार जामई ने मंत्री के अस्वासन पर हम से बात करते हुए कहा की मुझे नहीं लगता पेंशन मिलेगा क्यूंकि यह वही लोग जनके पास मैं अपने जिन्दा होने का सबूत दे रहा तह लेकिन मानने को तैयार नहीं थे। अब देखना यह है कि मौजूदा दिल्ली सरकार ओल्ड ऐज होम पेंशन के सरकारी दस्तावेज में असरार जामई को ज़िंदा कर पाती है या नहीं और पेंशन दिला पाती है या यूं ही खानापूर्ति करके कुछ दिनों बाद सर्द बस्ते में डाल देती है।

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