शबे कदर की इबादत हजार रातों से अफजल : मुफ्ती साजिद हसनी

पूरनपुर पीलीभीत ( एस.बी.टीम ) आल इण्डिया उलेम मशाइख बोर्ड के बैनर तले जामिया खदीजा लिल बनात अशरफ नगर में एक रोजा जश्नें अजमतें कुरान का आयोजन, किया गया कुरान पाक की तिलावत के साथ जश्न का शुभारम्भ हुआ इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कुरान पाक की फज़ीलत व अजमत पर विस्तार से अध्यन कराया उन्होनें कहा है कि रमजान की यह एक रात ‘‘शबे कदर‘‘ कहलाती है जो बहुत ही खैरों बरकत व फजीलत बाली रात है जिसमें इबादत करनें को कुरानें पाक में हज़ार महीनों से अफजल बताया है हज़ार महीनों के 38 साल 4 माह होते है यानी इस रात की इबादत पूरी जिन्दगी की इबादत से बेहतर है।

मुफ्ती साजिद हसनी ने कहा कि शबे कदर की इबादत हजार रातों से अफजल होती है उन्होनें हुजूर अलैहिस्सलाम की हदीस व्यान करतें हुए कहा कि नियत से इबादत के लिए खड़ा हो तो उसके पिछलें सारें गुनाह मुआफ कर दियें जातें है उन्होंने एक और हदीस व्यान करतें हुए कहा हुजूर अलैहिस्सलाम ने फरमाया कि तुुम्हारें ऊपर एक एैसा महीना आया है कि जिसमें एक रात हजार महीनों से अफजल है उन्होनें कहा है कि शवें कदर की रातें 21वी, 23वी, 25वी, 27वी और 29वी है उन्होनें कहा कि अल्लाह ताला शवें कदर में रहमतों के 300 सौ दरवाजें खोल देता है और जो भी दुआ मांगों कुबूल होती है।

इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी ने कहा कि रमजान रहमतों का महीना है इसी माह में कुरानें पाक नाजिल हुआ उन्होनें कहा कि रोजा हर मुस्लमान वालिग मर्द औरत पर फर्ज है उन्होंनें कहा है कि इस माह में नफ्ल का सवाव फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर गुना ज्यादा कर दिया जाता है मुसलमानों को झूठ गीवत चुगली से दूर रहना चाहिए उन्होनें कहा कि रमजान माह में पहला अशरा रहमत का दूसरा अशरा मगफिरत (वख्शिश) का और तीसरा जहन्नुम (नर्ख) से निजात का होता है।

आल इण्डिया उलेमा मशाइख बोर्ड के जिला अयध्क्ष मुफ्ती नूर मो0 हसनी ने कहा है कि जो लोग मालिकें निसाव है उन्हें चाहिए के अपनें माल से ढ़ाई फीसत 2.5 प्रतिशत जकात निकाल कर गरीब फकीर मिस्कीन की मदद करें। मुफ्ती नूर मो0 हसनी ने कहा है कि शवें कदर की शान यह है कि उसें हजार महीनों से अफजल करार दिया गया है जिसें यह रात मिल गई तो समझों के उसनेें अस्सी (80) साल से ज्यादा इबादत का अजर पा लिया आखिर में मुल्क में अमनों-चअमान की दुआ मांगी। मौलाना ताजवर हुसैन मौलवी तसलीम रज़ा मो, इरशाद हुसैन, शाहिद रजा जानें आलम अशरफी, मो0 आरिफ शहादत हुसैन आदि मौजूद रहें।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *