जामिया मिल्लिया : लॉ फैकल्टी के छात्रों ने स्विट्जरलैंड में लहराया तिरंगा

नई दिल्ली ( अर्शा मिर्ज़ा ) जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लिए यह साल उपलब्धियों का साल बनता जा रहा है। इस साल जहां मानव संसाधन की ओर से जामिया को बारह रैंकिंग प्रदान की गयी थी तो इंजीनियरिंग में जामिया को पहली बार टॉप बीस में जगह मिली। अब जामिया की लॉ फैकल्टी को इंडिया टुडे ने पहली बार टॉप टेन में जगह देते हुए प्रथम स्थान दिया है और अभी-अभी जेनेवा से एक अच्छी खबर यह आई है कि जामिया की लॉ फैकल्टी की टीम ने अन्तराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में जगह बनाई है।

लॉ फैकल्टी की इस उपलब्धि पर पढ़िए यूनिवर्सिटी सर्किल के लिए गुलाम हुसैन की विस्तृत रिपोर्ट।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लॉ फैकल्टी के छात्रों ने अंतर्राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में विश्व के पांच बेहतरीन विश्वविद्यालयों में स्थान प्राप्त किया है। लॉ फैकल्टी के दो छात्र प्रणव तंवर और आदिल सैफुद्दीन ने जेनेवा में हुए ‘नौवें नेल्सन मंडेला मानव अधिकार मूट कोर्ट प्रतियोगिता’ में भारत और जामिया का परचम लहराते हुए पांचवां स्थान हासिल किया।

इस प्रतियोगिता में जामिया ही एक मात्र भारतीय विश्वविद्यालय है जो प्रथम पांच में जगह बना पाया है। इसके अलावा प्रथम दस में भारत के दो और विश्वविद्यालय हिदायतुल्लाह राष्ट्रिय कानून विश्वविद्यालय और गुजरात राष्ट्रिय कानून विश्वविद्यालय है। प्रथम स्थान ज़िम्बाब्वे की मिडलैंड्स स्टेट यूनिवर्सिटी को मिला है और दूसरा स्थान यूएसए की याले यूनिवर्सिटी को मिला है। यह इस प्रतियोगिता का प्रारंभिक राउंड था। यहाँ से यह दस विश्वविद्यालय आगे के राउंड में हिस्सा लेंगे। इस प्रतियोगिता का यह प्रारंभिक राउंड 17 से 21 जुलाई तक स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में संपन्न हुआ।

इंडिया टुडे की रैंकिंग में लॉ फैकल्टी टॉप पर


बीते महीने जून में इंडिया टुडे ने जामिया की लॉ फैकल्टी को देश की केंद्रीय संस्थानों में प्रथम स्थान दिया है। इस विषय पर डीन साहिबा कहती हैं कि जामिया की लॉ फैकल्टी में पिछले एक साल में अकादमिक और व्यवस्थागत काफी नए कार्य हुए। अंतराष्ट्रीय स्तर की ‘मूट कोर्ट’ की व्यवस्था भी हुई जहां छात्र लगातार अभ्यास करते हैं और अपनी प्रतिभा को निखार पा रहे हैं। इसका खुशनुमा परिणाम आप देख रहे हैं। लगातार अकादमिक स्तर पर नए कार्यों को तरजीह मिल रही है। इससे पहले कभी भी इंडिया टुडे ने जामिया की लॉ फैकल्टी को टॉप टेन में भी जगह नहीं दी थी।
प्रशासन का मिला साथ

लॉ फैकल्टी की इन बड़ी उपलब्धियों के लिए डीन साहिबा ने जामिया के प्रशासन का भी शुक्रिया अदा किया है। वह कहती हैं कि मुझे डीन बने अभी एक साल पूरा होने जा रहा है। इस दौरान मैंने जब भी जामिया प्रशासन से अपनी फैकल्टी के लिए जो भी मदद मांगी, वह मिली है। फण्ड से लेकर हर तरह की मदद के लिए प्रशासन ने हमें निराश नहीं किया। खुल कर काम करने का जब अवसर मिलता है तब परिणाम इसी तरह स्वयं अच्छे होते जाते हैं।

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