नोटबंदी : अपने बास से कहना छैनु आया था

( एस.बी.विशेष ) गजब है जिस नोटबंदी का उद्देश्य था कि जाली नोट जो प्रचलन में हैं वह आटोमेटिक रद्द हो जाएगा । लेकिन यह क्या 43.47 करोड़ जाली नोट रिजर्व बैंक के पास वापस आ गए ।

तो क्या नोटबंदी की अधूरी तय्यारी का लाभ जाली नोट वालों ने एमेंटी स्कीम समझ कर उठाया? और जाली नोट के बदले असली 43.47 करोड़ रुपए बदलावाए ? विपक्ष ने उस कड़ाके की ठंड और शादी विवाह के समय लिए गए प्रधानमंत्री की 56 इंचिए फैसले का विरोध किया था।

नोटबंदी में प्रधानमंत्री के 50 दिन के आश्वासन के बाद भी हालात आम जनता के अबतक नहीं सुधरे। कई लोगों ने लाइन में खड़े होकर अपनी जान भी गंवाई । उसके बाद नोटबंदी का परिणाम यह हुआ कि जाली नोट जमा हो गए तो बहुत बड़ी लापरवाही है सरकार को चाहिए कि स्पष्ट करें कि कितने जाली नोटों के बदले असली नोट बैंकों ने जारी किए। क्या सरकार बैंकों को इस बाबत नोटिस जारी करेगी??
इस मुद्दे पर एनडीटीवी के प्रसिद्ध पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पर पोस्ट किया है। और अंत में एक नोट लिखा है कि ” अपने बास से कहना छैनु आया था ।

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