दिल्ली AMUOBA के लिए चुनावी जगह और तिथि के एलान न होने से उम्मीदवार में शक व शुबहात

नई दिल्ली ( एस.बी.टीम.विशेष ) अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पूर्व छात्र संघटन (दिल्ली यूनिट) के चुनाव का बिगुल तो बज चूका है लेकिन अभी तक प्रशानिक रूप से न तो तिथित और न ही जगह की कोई घोषणा की गयी जबकि चुनावी मंथ की घोषणा नए आरो अधिवक्ता फरीद खान ने नवम्बर के आखिर में कराने की कर दी है। हालाँकि इसका भी एलान उन्हों अभी तक प्रशानिक रूप से नहीं किया है इस से वह लोग न खुश हैं जो प्रत्याशी की रूप में चुनावी मैदान में होंगे।

तारिख और जगह की घोषणा को लेकर फरीद खान से जब हम ने बात की तो उन्हों ने बताय की हम इस का भी जल्द एलान कर देंगे। उन्हों यह भी बताया की अभी तक हामरे पास दस्तावेज़ नहीं आये हैं इसी लिए तारिख और जगह के एलान में देरी हो रही है। उन्हों ने यह भी तर्क दिया की इसी बीच सर सय्यद डिनर भी है हम चाहते हैं की डिनर निकल जाये फिर तरीक का एलान करें।

एएमयूओबा कमेटी की जानिब से नए आरो अधिवक्ता फरीद खान की बातों से चुनावी उम्मीदवार शक व शुबहात में पड़ गए हैं और पूर्व पदधकारिओं पर तरह तरह की टिपण्णियां भी शुरू कर दी हैं।

शक व शुबहात और टिपणिओं के लेकर हम ने कुछ उम्मीदवारों से भी बात की तो उन्हों ने अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताय की आखिर जब चुनाव के लिए महीने का एलान कर दिया गया है तो फिर तारिख और जगह का एलान करने में किया परेशनी आ रही है। दूसरी बात दस्तावेज़ की है तो पुराने दस्तावेज़ पर भी तारिख और जगह का एलान किया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।

सर सय्यद डिनर पर उन उम्मीदवारों का कहना है की जहाँ तक इसका मामिला है उस से तारिख और जगह का कोई लेना देना नहीं है हाँ ऐसा होसकता है की पुराने पदधकारी उसे करवा कर चुनावी लाभ उठायें इसी लिए तारिख और जगह के एलान में देरी हो रही हो।

इन लोगों ने तिथि और जगह को लेकर यह भी कहा की हमें डर है की कहीं उसी तरह का मामिला फिर न पेश आये जिस तरह का इस चुनाव से पहले आया था और ज़बरदस्त धांधली हुयी थी।

उम्मीदवारों ने बात करते समय आरो की उन बातों को नकारते हुए कहा की उन्हें अस्पष्ट रूप से वह तर्क देना होगा जिस पर हमें भरोसा हो सके क्यों की तारिख और जगह के एलान में न तो दस्तावेज़ आड़े अरे हैं और न ही सर सय्यद डिनर।
उम्मीदवारों ने आरो के बारे में बात करते हुए कहा की वह राजनीतक मैदान काफी तजुर्बा रखते हैं और काफी सीनियर अधिवक्ता भी हैं फिर भी वह ऐसा कर रहे हैं जो हमरी समझ से बहार है जबकि सब को मालूम है की आखिरी वक़त में जगह बुक कराने में काफी परेशानी आती है।

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