सीसिकता सीरिया ! गूंगी इंसानियत ख़ामोश मुस्लिम दुनिया

नई दिल्ली ( एस.बी.स्पेशल रिपोर्ट बी अब्दुल क़वी) सीरिया! (शाम) अरब महाद्वीप का एक खूबसूरत और खुशहाल देश आज बाप बेटे की तानाशाही और जिद के कारण मलबे में बदलता जा रहा है ।

अपने ही देश के लोगों पर बमबारी करके जमहूरीयत कायम करने का ढोंग करने वाले बशर-अल-असद पर दुनिया खामोश है ।।
मानवता के तथाकथित सबसे बड़े चिंतक कहलाने वाले अमेरिका और रूस दोनों मिलकर लुक्का-छुप्पी खेल रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे दोनों महाशक्तियों ने किसी गुप्त एजेंडा के तहत सीरिया के नागरिकों पर अपने हथियारों का परिक्षण कर रहे हैं। यह वही अमेरिका है जिसने ईराक, लीबिया, अफगानिस्तान में अपनी फौज तानाशाही को खत्म करने के नाम पर उतार देता है लेकिन आज उसे सीरिया में असद सरकार की तानाशाही नहीं दिख रही है ।।
वह खुलकर रूस और असद के सामने नहीं आ रहा है।

वह तुर्की और बागियों के सहारे असद पर कार्रवाई करने का ढोंग कर रहा है । पहले जैसे ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने रूस के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया था उसी जैसा आज सिरिया में बागियों को हथियार देकर सबको आपस में लडवा रहा है ।।
आखिर खुद अमेरिका अपनी फौज तानाशाही खतम करने के लिए सीरिया में क्यों नही उतार रहा है ।।

रूस असद के साथ मिलकर और अमरीका बागियों के साथ मिलकर सीरिया के नागरिकों का नरसंहार कर रहे
हैं।।
सीरिया में आसमान से बरसते बम और मलबे की ढेर में बदलती इमारतें और मलबे से निकलती बच्चों महिलाओं की लाशें। हर तरफ लाश और खून से सनी सड़कें ।
रोते बिलखते बच्चे और महिलाएं ।
लेकिन पूरी दुनिया खामोश तमाशबीन बनी हुई है ।
किसी की हिम्मत नहीं हो रही है कि रूस को रोकें ।

अबतक लाखों लोगों की मृत्यु हो चुकी है जिसमें सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाऐं है लेकिन सब मानवता का नरसंहार बैठकर देख रहे हैं।।

मुसलमानो के ठेकेदार मुस्लिम जगत खामोश हैं खामोशी इस कदर है कि मिडिया में ऐसी खबरों को जगह नहीं मिल रही है ।
अरब से लेकर पाकिस्तान के अखबार श्रीदेवी की मौत की रिपोर्टिंग में व्यस्त हैं।।

“एक दौर ऐसा आएगा जब तुम्हारी तादाद ज्यादा होगी फिर भी तुम पर दूसरे हाकिम होंगे । तुम पर लोग भूखे की तरह टूट पडेंगे जैसा भूखा खाने पर टूट पड़ता है ।”

1400 साल पहले की उपरोक्त बातों पर जरा गौर करो क्या यह वही काल है? ऐसे समय के लिए कहा गया था कि जब कभी ऐसा वक्त आऐ तो एक प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा हो जाना और मतभेदों को भुला कर एक इश्वर और उसके रसूल की तरफ लौट आना ।।
मुसलमानो इस्लाम के तुम अनुयायी हो जिसका अर्थ है शांति ।।

जब जब इस धरती पर अशांति फैलाने अथवा मानव अधिकार का हनन करने का प्रयास फिरओनें ने की है तब तब इश्वर ने तुम्हारी मदद की है ।। लेकिन आज तुम इतने सहम गए हो कि दूतावासों और दूसरे ठिकानों पर विरोध तक नहीं कर रहे हो।

एक मानव का बेजा कत्ल पूरी दुनिया के मानवता का कत्ल है लेकिन सिरिया से लेकर फिलिस्तीन बर्मा तक लाशें ही लाशें हैं। हम जीवित हैं सिर्फ अपने लिए कहां जुल्म हो रहा है हमें उस से क्या लेना-देना फिर यह कैसा कुटुम्बकम् है जहां मानवता का नरसंहार हो रहा है और हम विरोध तक करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे ।।
सच कहूं तो मानवता की बात करने वाले भी हम सब गूंगे हो गए हैं। इंसानियत मर चुकी है!!

याद रखना आज तुम तमाशबीन बने हो और खुले आम मानवता का खून होता देख रहे हो विरोध करने की भी हिम्मत नहीं कल इतिहास में जब लिखा जाएगा तो तुम्हें तुम्हारी कायरता का बखान जरूर होगा ।।

तुम्हें 313 पर नाज था ना यह पूर्वज थे तुम्हारे। अब आने वाली पीढ़ी जब इस काल का इतिहास पढेगी जब वह पढेगी की पूरी दुनिया में तुम्हारी तादाद ज्यादा थी और तुम्हारे सामने मासूम बच्चों के खून की होली खेली गई और तुम अपने घरों में बैठकर तमाशा देखते रहे ।
तो तुम्हारी कायरता पर लोग आश्चर्यचकित होंगे और इस काल को कायरता के लिए याद रखा जाएगा।।

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